रविवार, 13 सितंबर 2009

swapn

स्वप्न - २
रात भर रंगीनियाँ दिखाकर भरमाकर -
लौट जाते हैं तड़पता छोड़कर 
भोर के द्वारे से 
वैश्या की तरह 
मेरी आँखों से हसीन सपने !

कोई टिप्पणी नहीं: